Entry No. 2 : कृष्ण लिला

पहन कर ” पीला ” पीताम्बर आज नाचेकृष्ण कन्हैया।चारों और गोपियों संग जुमे नटखट कन्हैया सजाके गले मेे “पीले ” फूलों की मालाभक्तो का हे अमृत का प्याला देवकी यशोदा है जिनकी मैयाऐसे है हमारे कृष्ण कन्हैया। मोर मुकुट सर पर है धारी,ये है मोहन गिरिधारि। गोकुल का है सबसे Read more…

आखिर और कब तक?

Entry No. 22 : आखिर और कब तक?

मैंने बहोत देखे इंसानपर खोखले से इस ज़मीर मे मैंने इंसानियत नहीं देखीमैंने कई रिश्ते निभाए लेकिन रिश्तों में भी खौफनाक हैवानियत ही देखीहां सच है भाई बहन का रक्षक होता हैवंही इक भाई के हाथों बहन की इज्जत शर्मसार होते देखीएक पिता जो बेटी का अभिमान होता हैउस पिता Read more…

अपनों को बदले देखा है मैंने

Entry No. 20 : अपनों को बदले देखा है मैंने

समंदर को पिघलते देखा है मैंने..हां अपनों को बदलते देखा है मैंने .. आग से राख होते ..राख को खाक होते .. हवाओं को रुख बदलते ..उस रुख में परिंदो को उड़ते देखा है मैंने.. पर्वतों को चट्टान होते ..चट्टानों को पत्थर होते .. पत्थरों से मकान बनते ..मकानों को Read more…